श्री बूट भवानी माताजी मंदिर अरनेज का इतिहास | चमत्कार और दर्शन जानकारी
अरनेज (गुजरात) स्थित श्री बूट भवानी माताजी मंदिर का इतिहास, चमत्कार, दर्शन समय और यात्रा जानकारी पढ़ें। जानें अंग्रेजों के समय का अद्भुत चमत्कार और भक्तों की आस्था।
श्री बूट भवानी माता जी का इतिहास
श्री बूट भवानी माताजी मंदिर, अरनेज (गुजरात) एक चमत्कारिक शक्तिपीठ है। अहमदाबाद जिले के धोलका तालुका में स्थित अरनेज गांव केवल एक साधारण गांव नहीं है, बल्कि श्री बूट भवानी माताजी के अनोखे आशीर्वाद और चमत्कारों के कारण प्रसिद्ध तीर्थस्थल बन गया है। अहमदाबाद से लगभग ७० किलोमीटर और धोलका से २४ किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर ५०० वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। यहां की गहरी आस्था और दिव्य शक्ति आज भी लाखों भक्तों को अपनी ओर खींचती है।
बूट भवानी माता का ऐतिहासिक परिचय
बूट भवानी माताजी चारण कुल में प्रकट हुई मानी जाती हैं। सौराष्ट्र के गिर क्षेत्र के नेसड़ा गांव के बापल देथा चारण और उनकी पत्नी देवळबा हिंगलाज माताजी की परम भक्त थीं। उन्हें सात पुत्रियां हुईं, जिनमें बूट भवानी, बलाड और बहुचरा माताजी शामिल हैं।
माताजी का जन्मस्थान सापकड़ा (हलवद तालुका) के रूप में जाना जाता है। बाद में वे अरनेज में विराजमान हुईं और यहीं उनका मुख्य धाम स्थापित हुआ। यहां की मूर्ति स्वयंभू मानी जाती है। यह माताजी सोनी, वाणिया, पटेल, राजपूत, ब्राह्मण, कोली आदि कई जातियों की कुलदेवी हैं।
बूट भवानी का अंग्रेजों पर चमत्कार
बूट भवानी माताजी मंदिर की सबसे प्रसिद्ध और चमत्कारिक घटना अंग्रेजों के जमाने की है। अंग्रेज भारत में रेलवे लाइन बिछा रहे थे। अहमदाबाद से भावनगर जाने वाली रेलवे लाइन बन रही थी, जो धंधुका-बोटाद के बीच अरनेज गांव के पास से गुजरनी थी।
जब मजदूरों ने अरनेज के आसपास पट्टे बिछाने का काम शुरू किया तो अजीब घटनाएं होने लगीं। पट्टे बार-बार उखड़ जाते, स्लीपर टूट जाते और पूरा ट्रैक बिखर जाता। मजदूर रात भर मेहनत करके पट्टे बिछाते, लेकिन सुबह उठकर देखते तो सब कुछ पहले जैसा बिखरा पड़ा होता। यह घटना बार-बार दोहराई जाती रही।
अंग्रेज अधिकारी और मजदूर बहुत परेशान हो गए। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से कारण ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कुछ नहीं मिला। आखिरकार स्थानीय लोगों ने बताया कि “यह जमीन पवित्र है। यहां माता बूट भवानी का प्रकट्य स्थल है। माताजी को मनाए बिना यह काम आगे नहीं बढ़ेगा।”
अंग्रेज अधिकारियों ने पहले तो इस बात को हंसकर उड़ा दिया, लेकिन जब काम पूरी तरह ठप हो गया तो उन्होंने स्थानीयों की सलाह मान ली। वे माताजी के मंदिर पहुंचे, दर्शन किए और माताजी को नारियल, चुंदड़ी तथा सवा रुपया अर्पण किया। साथ ही उन्होंने यह व्रत लिया कि “यदि रेलवे लाइन आसानी से पूरी हो जाए तो यह परंपरा हमेशा जारी रखेंगे।”
अर्पण करने के बाद चमत्कार हो गया। पट्टे बिछाने का काम बिना किसी बाधा के आगे बढ़ा और रेलवे लाइन सफलतापूर्वक पूरी हो गई। अंग्रेज अधिकारी भी इस दिव्य शक्ति को मान गए और माताजी को सलाम किया।
तब से लेकर आज तक, अरनेज गांव की सीमा से गुजरने वाली हर ट्रेन अनिवार्य रूप से रुकती है और हॉर्न बजाकर माताजी को सलाम करती है। यह परंपरा अंग्रेजों के समय से चली आ रही है और आज भी भारतीय रेलवे विभाग इसे बनाए रखता है। यह गुजरात की आस्था का एक अनोखा और जीवंत प्रतीक है।
बूट भवानी मंदिर की विशेषताएं
मंदिर का परिसर लगभग ११ एकड़ में फैला हुआ है और हाल ही में इसे खूबसूरत तरीके से नवीनीकृत किया गया है। यहां दोनों समय भोजन प्रसादी के लिए अन्नक्षेत्र की व्यवस्था है। चैत्र शुक्ल पूनम के दिन माताजी का प्रकट्य दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। हर पूनम, रविवार, मंगलवार और संकट चौथ को भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए आती है।
मंदिर के गेट के बाहर माताजी की चुंदड़ी प्रसाद और बच्चों के लिए खिलौने उपलब्ध होते हैं। गेट के बाहर अच्छी पार्किंग व्यवस्था है। रहने की सुविधा के लिए कमरे और बड़े हॉल भी उपलब्ध हैं। मानता पूरी होने पर चांदी की जीभ चढ़ाने की परंपरा भी यहां प्रचलित है।
अगर आप आस्था, शांति और दिव्य कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो श्री बूट भवानी माताजी के अरनेज धाम की यात्रा अवश्य करें। यहां आने वाले हर भक्त को माताजी के आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।
बूट भवानी माता सापकड़ा और रोजका
माताजी का मुख्य प्रकट्य सापकड़ा गांव में हुआ माना जाता है, जहां जेठवाधार मेरिया भुवानी की समाधि आज भी मौजूद है। इसके बाद उन्होंने रोजका गांव में मेरिया भुवा के साथ एक अनोखा चमत्कार दिखाया। लोककथा के अनुसार एक डोशी और सुंदर कन्या के रूप में यह घटना घटी। इसके बाद वे अरनेज गांव में स्थापित हुईं और यहीं उनका मुख्य जागृत धाम बन गया।
ये सभी बातें लोककथाओं, भक्ति परंपरा और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित हैं। भक्तों के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है। विभिन्न वीडियो और लेखों में कुछ भिन्नताएं देखने को मिलती हैं, लेकिन आज अरनेज माताजी का सबसे प्रसिद्ध और मुख्य धाम है।
नोट: यह जानकारी सार्वजनिक स्रोतों, शोध और लोकप्रचलित कथाओं पर आधारित है। रोजका और सापकड़ा गांव में भी बूट भवानी माताजी के मंदिर हैं।
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